HI : For The Hindu, By The Hindu
संध्या दर्शन बृजधाम | 26.06.2026
गोपेश्वर महादेव दर्शन | 26.06.2026
संध्या दर्शन वृंदावन | 26.06.2026
श्री ॐकारेश्वर ज्योतिर्लिंग संध्याकालीन आरती श्रृंगार | 26.06.2026
श्री सोमनाथ ज्योतिर्लिंग संध्या शृंगार आरती दर्शन | 26.06.2026
श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन | 26.06.2026
राजाधिराज द्वारकाधीश जी के मङ्गला आरती दर्शन | 26.06.2026
आज के मंगला दर्शन श्री राधाबल्लभ जी वृन्दावन धाम | 26.06.2026
आज के दर्शन श्री गिर्राज जी दानघाटी गोवर्धन | 26.06.2026
मंगला दर्शन श्री गिर्राज जी मुखारविंद जतिपुरा | 26.06.2026
मंगला आरती दर्शन श्री राधारमण लाल जी वृन्दावन धाम | 26.06.2026
आज के श्रृंगार दर्शन श्री बांके बिहारी जी वृन्दावन धाम | 26.06.2026
आज के श्रृंगार दर्शन श्री नन्दमहल नंदगांव | 26.06.2026
आज के श्रृंगार दर्शन श्री लाड़ली जी बरसाना धाम | 26.06.2026
आज के श्रृंगार दर्शन श्री राधावल्लभ लाल जी | 26.06.2026
राजाधीराज द्वारीकाधीशजी के संध्या आरती एवं पुष्पशृंगार दर्शन 🙏25/06/2026
बृजधाम संध्या दर्शन 25/06/2026
बृजधाम संध्या दर्शन 25/06/2026
बृजधाम संध्या दर्शन 25/06/2026
बृजधाम संध्या दर्शन 25/06/2026
अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
तेरे भक्त जनो पर,
भीर पडी है भारी माँ ।
दानव दल पर टूट पडो,
माँ करके सिंह सवारी ।
सौ-सौ सिंहो से बलशाली,
अष्ट भुजाओ वाली,
दुष्टो को पलमे संहारती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
माँ बेटे का है इस जग मे,
बडा ही निर्मल नाता ।
पूत - कपूत सुने है पर न,
माता सुनी कुमाता ॥
सब पे करूणा दरसाने वाली,
अमृत बरसाने वाली,
दुखियो के दुखडे निवारती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
नही मांगते धन और दौलत,
न चांदी न सोना माँ ।
हम तो मांगे माँ तेरे मन मे,
इक छोटा सा कोना ॥
सबकी बिगडी बनाने वाली,
लाज बचाने वाली,
सतियो के सत को सवांरती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
चरण शरण मे खडे तुम्हारी,
ले पूजा की थाली ।
वरद हस्त सर पर रख दो,
मॉ सकंट हरने वाली ।
मॉ भर दो भक्ति रस प्याली,
अष्ट भुजाओ वाली,
भक्तो के कारज तू ही सारती ।
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥
अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली ।
तेरे ही गुण गाये भारती,
ओ मैया हम सब उतरें, तेरी आरती ॥